भार-रहित ध्यान – १
जब तक आप शरीर के प्रति आसक्त रहते हैं, यह गहरे ध्यान के लिए बाधा बन जाता है। आत्मा दिव्य का एक अंश है, सर्वशक्तिमान और सीमाहीन। इस सूत्र के माध्यम से शरीर और मन की सीमाओं को अतिक्रम करते हुए निर्भार अवस्था का अनुभव करें।


जब तक आप शरीर के प्रति आसक्त रहते हैं, यह गहरे ध्यान के लिए बाधा बन जाता है। आत्मा दिव्य का एक अंश है, सर्वशक्तिमान और सीमाहीन। इस सूत्र के माध्यम से शरीर और मन की सीमाओं को अतिक्रम करते हुए निर्भार अवस्था का अनुभव करें।


सीधी रीढ़ को बनाए रखकर गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव को घटाया जा सकता है। निर्भारता की अनुभूति प्राप्त होने पर विचार विलीन हो जाते हैं। आत्मा के साथ संरेखित होकर भौतिक क्षेत्र को अतिक्रम करें और नित्य के साथ एकीभूत हों।


Vigyan Bhairav Tantra: The Path from the Self to the Divine Today, almost everyone is struggling with some form of difficulty or challenge and searching for a single solution: meditation. The growing popularity of meditation arises from the promise that it can free us from unnecessary stress, anxiety, and inner restlessness. Although many people attempt…
विज्ञान भैरव तंत्र विश्व का एक महत्त्वपूर्ण आध्यात्मिक ग्रंथ है जो दिव्य की प्राप्ति के लिए १२ सरल विधियाँ प्रदान करता है। तंत्र आपको बिल्कुल वैसे ही स्वीकार करता है जैसे आप हैं। कश्मीरी शैववाद में निहित, यह अद्वैत दर्शन का प्रतिनिधित्व करता है।
तंत्र आध्यात्मिक सिद्धांतों को ध्यान की साधना में निहित करता है। प्रेम, काम और ध्यान के माध्यम से, तंत्र दिव्य साक्षात्कार का मार्ग प्रशस्त करता है, जहाँ शरीर, मन और आत्मा एकता में विलीन हो जाते हैं।
तंत्र एक गहन आध्यात्मिक विज्ञान है, जो व्यक्तिगत चेतना और ब्रह्मांड की एकता में निहित है। आजकल गलतफहमियों के कारण इसकी असली पहचान खो गई है, लेकिन इसका सार अभी भी दिव्य साक्षात्कार का मार्ग प्रशस्त करता है।