पंचेन्द्रिय ध्यान – ३
इंद्रियों को अंतर्मुखी करके आंतरिक आनंद और परमानंद की अनुभूति को जागृत करो।


इंद्रियों को अंतर्मुखी करके आंतरिक आनंद और परमानंद की अनुभूति को जागृत करो।


प्रियजन या दिव्य की प्रिय स्मृतियों में श्वास को अंतर्मुखी करके गहन भक्ति और ध्यान का अनुभव करो।


श्वास के विराम पर ध्यान केंद्रित करके दैनिक कार्यों में सचेतता और शांति विकसित करो।


सचेत रूप से स्वप्नों पर नियंत्रण प्राप्त करके अवचेतन मन की शक्तियों को जागृत करो।


गहरी श्वास और मानसिक शांति से अवचेतन जगत में प्रवेश करो और स्वप्नों पर सचेत नियंत्रण पाओ।


मन को साक्षी बनाकर तीसरी आंख पर ध्यान केंद्रित करो और स्वप्न जगत की रहस्यमय यात्रा शुरू करो।