ध्यान सीखें – भाग २
ध्यान केवल तब शुरू करें जब आप मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार हों। मन एक संग्रहण केंद्र है जो अनुभवों और स्मृतियों से भरा होता है। यह समझना ध्यान की सफलता के लिए महत्त्वपूर्ण है।
ध्यान जीवन से भागने की कोई तकनीक नहीं है, बल्कि इसे स्पष्ट रूप से देखने का एक तरीका है।
यह खंड ध्यान को जागरूकता के रूप में अन्वेषण करता है — कैसे मौन प्रकट होता है, ध्यान कैसे कार्य करता है, और जब निरीक्षण गहरा होता है तो स्पष्टता कैसे स्वाभाविक रूप से उत्पन्न होती है। ये लेख अंधे अनुसरण के लिए निर्देश नहीं हैं, बल्कि बिना दबाव या विश्वास के अंतर्मन में झाँकने के आमंत्रण हैं।
ध्यान केवल तब शुरू करें जब आप मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार हों। मन एक संग्रहण केंद्र है जो अनुभवों और स्मृतियों से भरा होता है। यह समझना ध्यान की सफलता के लिए महत्त्वपूर्ण है।
ध्यान न तो बचने का मार्ग है और न ही मन को शांत करने का साधन। वह वर्तमान क्षण में पूरी तरह जीने के लिए स्वयं को प्रशिक्षित करने की गहन साधना है, जहाँ शरीर, मन और प्राण एक सूत्र में बँधते हैं।


मन विचारों और संस्कारों का संग्रह है। इसे नियंत्रित नहीं, केवल निर्देशित किया जा सकता है।


सत्-चित्-आनन्द: श्रवण की विधि, अन्तरभाग की यात्रा, और दैवीय इच्छा के साथ सामंजस्य।