True Love

  • प्रेम और सम्बन्ध – ४

    प्रेम अनंत है, विशाल आकाश की भाँति। फिर भी हम प्रायः इस अनंतता को संबंधों की सीमाओं या अहंकार के पिंजरे में बंद करने का प्रयास करते हैं। प्रेम को समेटने के इस प्रयास में हम स्वयं को ही आहत करते हैं। जैसे नदी के प्रवाह को नहीं रोक सकते, वैसे ही प्रेम के प्रवाह को भी नहीं रोक सकते।