श्वास-जागरूकता – ३
विज्ञान भैरव तन्त्र सूत्र २६। नाभि-केन्द्र पर श्वास का ध्यान, जीवन का अक्ष, और ध्यान-समाधि की प्राप्ति।

विज्ञान भैरव तन्त्र सूत्र २६। नाभि-केन्द्र पर श्वास का ध्यान, जीवन का अक्ष, और ध्यान-समाधि की प्राप्ति।

विज्ञान भैरव तन्त्र सूत्र २५। श्वास के परिवर्तन-बिन्दुओं पर ध्यान, रिक्तता का अनुभव, और आत्म-विलयन।

विज्ञान भैरव तन्त्र सूत्र २४। श्वास की मौलिक शक्ति, वर्तमान में निवास, और सोहम् मन्त्र का स्वयं-जन्म।

सत्-चित्-आनन्द: श्रवण की विधि, अन्तरभाग की यात्रा, और दैवीय इच्छा के साथ सामंजस्य।

तंत्र के प्रकृत सार को समझना और आधुनिक भ्रांतियों को दूर करना। यह लेख तंत्र को इसके सच्चे आध्यात्मिक संदर्भ में प्रस्तुत करता है, न कि विकृत रूप में।

तंत्र-योग का सार ब्रह्मांड की एकता और आंतरिक ध्यान पर आधारित है। इस लेख में जानें कि कैसे तंत्र ध्यान के माध्यम से आध्यात्मिक जागरण प्रदान करता है।