नाद ध्यान – २
प्राणव – ब्रह्मांडीय ध्वनि का जाप और उसके बाद आने वाले मौन में विलीन होना। ॐ की कंपन शक्ति से आध्यात्मिक संरेखण अनुभव करें।

प्राणव – ब्रह्मांडीय ध्वनि का जाप और उसके बाद आने वाले मौन में विलीन होना। ॐ की कंपन शक्ति से आध्यात्मिक संरेखण अनुभव करें।

अनाहद नाद – प्रहारित ध्वनि के सार में डूबकर आंतरिक शांति खोजें। शब्दों के जाल से मुक्त होकर ब्रह्मांड की सदा-अनुनाद करने वाली ध्वनि सुनें।

इंद्रियों को अंतर्मुखी करके आंतरिक आनंद और परमानंद की अनुभूति को जागृत करो।

श्वास की लय और गहराई जीवन की लंबाई निर्धारित करती है। कुम्भक साधना से कुंडलिनी जागरण होता है।

मन को साक्षी बनाकर तीसरी आंख पर ध्यान केंद्रित करो और स्वप्न जगत की रहस्यमय यात्रा शुरू करो।

तंत्र धर्म-निरपेक्ष है और आत्म-खोज का एक संपूर्ण विज्ञान। यह आपको वैसे ही स्वीकार करता है।
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