ध्यान सीखें – भाग ३
ध्यान में शरीर और मन दोनों प्रतिरोध करते हैं। अवचेतन मन में दबी हुई स्मृतियाँ और भावनाएँ होती हैं। इन्हें समझने के बिना सीधा ध्यान करना कठिन होता है।
ध्यान में शरीर और मन दोनों प्रतिरोध करते हैं। अवचेतन मन में दबी हुई स्मृतियाँ और भावनाएँ होती हैं। इन्हें समझने के बिना सीधा ध्यान करना कठिन होता है।
ध्यान केवल तब शुरू करें जब आप मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार हों। मन एक संग्रहण केंद्र है जो अनुभवों और स्मृतियों से भरा होता है। यह समझना ध्यान की सफलता के लिए महत्त्वपूर्ण है।
ध्यान न तो बचने का मार्ग है और न ही मन को शांत करने का साधन। वह वर्तमान क्षण में पूरी तरह जीने के लिए स्वयं को प्रशिक्षित करने की गहन साधना है, जहाँ शरीर, मन और प्राण एक सूत्र में बँधते हैं।
तंत्र आध्यात्मिक सिद्धांतों को ध्यान की साधना में निहित करता है। प्रेम, काम और ध्यान के माध्यम से, तंत्र दिव्य साक्षात्कार का मार्ग प्रशस्त करता है, जहाँ शरीर, मन और आत्मा एकता में विलीन हो जाते हैं।
तंत्र एक गहन आध्यात्मिक विज्ञान है, जो व्यक्तिगत चेतना और ब्रह्मांड की एकता में निहित है। आजकल गलतफहमियों के कारण इसकी असली पहचान खो गई है, लेकिन इसका सार अभी भी दिव्य साक्षात्कार का मार्ग प्रशस्त करता है।

विज्ञान भैरव तंत्र की इस विधि में, “हा” ध्वनि के माध्यम से मन को शांत किया जाता है। साधना के माध्यम से क्रोध का शमन और अत्यधिक सोच को दूर करने का यह सरल तरीका गहन आंतरिक शांति की ओर ले जाता है।