कर्म-योग: भाग्य और स्वतंत्र इच्छा
हम ब्रह्माण्ड के अंश हैं, और यह ब्रह्माण्ड हमारे भीतर निवास करता है। जैसे पृथ्वी अपने अक्ष पर घूमती है, हमारा कर्म भी चक्रीय रूप से अपने फल लौटाता है। स्वतंत्र इच्छा और कर्म का परस्पर खेल हमारे अस्तित्व का सार है।
हम ब्रह्माण्ड के अंश हैं, और यह ब्रह्माण्ड हमारे भीतर निवास करता है। जैसे पृथ्वी अपने अक्ष पर घूमती है, हमारा कर्म भी चक्रीय रूप से अपने फल लौटाता है। स्वतंत्र इच्छा और कर्म का परस्पर खेल हमारे अस्तित्व का सार है।

मन विचारों और संस्कारों का संग्रह है। इसे नियंत्रित नहीं, केवल निर्देशित किया जा सकता है।

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