प्रेम: आनन्द और परमानन्द
क्षणिक आनंद और शाश्वत परमानंद में क्या अंतर है? इस लेख में जानें कि कैसे प्रेम को आध्यात्मिक जागरण का माध्यम बनाया जा सकता है।

क्षणिक आनंद और शाश्वत परमानंद में क्या अंतर है? इस लेख में जानें कि कैसे प्रेम को आध्यात्मिक जागरण का माध्यम बनाया जा सकता है।

प्रेम विक्षिप्तों का मार्ग है, क्योंकि बुद्धि तर्क और अहंकार का आसन है। सच्चा प्रेम बुद्धि से परे होता है।

क्रोध किसी भी समस्या का समाधान नहीं कर सकता। न ही इसे दबाया जा सकता है, क्योंकि दमन इसकी तीव्रता को और बढ़ा देता है, जिससे यह और अधिक विनाशकारी बन जाता है। केवल संयम, चिंतन और मनन के अभ्यास से ही क्रोध को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है।
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