प्रेम और सम्बन्ध – २
हमें यह पुनः सीखना होगा कि प्रेम दो शरीरों का नहीं, दो आत्माओं का मिलन है। हाल के दशकों में हमने शरीर को अनावश्यक महत्व दिया है। शायद मूर्तिपूजा और विस्तृत अनुष्ठानों के माध्यम से हमारे मन और आत्मा भी जड़ हो गए हैं।
अधिकांश मानवीय संघर्ष दूसरों से नहीं, बल्कि मन की अचेतन क्रियाओं से उत्पन्न होता है।
यह खंड जागरूकता के माध्यम से संबंधों, भावनाओं और मनोवैज्ञानिक पैटर्न का अन्वेषण करता है — यह उजागर करते हुए कि नियंत्रण नहीं, बल्कि स्पष्टता ही मानवीय संबंधों में परिवर्तन लाती है।
हमें यह पुनः सीखना होगा कि प्रेम दो शरीरों का नहीं, दो आत्माओं का मिलन है। हाल के दशकों में हमने शरीर को अनावश्यक महत्व दिया है। शायद मूर्तिपूजा और विस्तृत अनुष्ठानों के माध्यम से हमारे मन और आत्मा भी जड़ हो गए हैं।
प्रेम के मार्ग से जीवन का हर सुख, यहाँ तक कि स्वयं परमात्मा को भी प्राप्त किया जा सकता है। इसका एकमात्र मूल्य है अहंकार का समर्पण। जब अहंकार छूट जाता है, तो सब कुछ प्राप्त हो जाता है — वह भी जो साधारण बुद्धि दस जन्मों में नहीं पा सकती।
Due to some technical glitch, bookings are not working right now. Please check back soon — we appreciate your patience 🙏