नाद ध्यान – १
अनाहद नाद – प्रहारित ध्वनि के सार में डूबकर आंतरिक शांति खोजें। शब्दों के जाल से मुक्त होकर ब्रह्मांड की सदा-अनुनाद करने वाली ध्वनि सुनें।

अनाहद नाद – प्रहारित ध्वनि के सार में डूबकर आंतरिक शांति खोजें। शब्दों के जाल से मुक्त होकर ब्रह्मांड की सदा-अनुनाद करने वाली ध्वनि सुनें।

मन विचारों और संस्कारों का संग्रह है। इसे नियंत्रित नहीं, केवल निर्देशित किया जा सकता है।

इंद्रियों को अंतर्मुखी करके आंतरिक आनंद और परमानंद की अनुभूति को जागृत करो।

श्वास की लय और गहराई जीवन की लंबाई निर्धारित करती है। कुम्भक साधना से कुंडलिनी जागरण होता है।

प्रियजन या दिव्य की प्रिय स्मृतियों में श्वास को अंतर्मुखी करके गहन भक्ति और ध्यान का अनुभव करो।

श्वास के विराम पर ध्यान केंद्रित करके दैनिक कार्यों में सचेतता और शांति विकसित करो।