विज्ञान भैरव तंत्र — हिंदी लेख

ॐ – एक अक्षर जो बोला नहीं, सुना जाता है
यह किसी धर्म का चिह्न नहीं है। यह सृष्टि की वह आवाज़ है जो तब भी थी जब कोई सुनने वाला नहीं था। संसार के लगभग हर कोने में — चाहे वह किसी भी संस्कृति का हो, किसी भी परंपरा…

विज्ञान भैरव तंत्र-चेतना का विज्ञान
विज्ञान भैरव तंत्र — वह प्राचीन विज्ञान जो आपको स्वयं से मिलाता है | यह कोई धर्म नहीं, कोई कर्मकांड नहीं — यह चेतना का सीधा विज्ञान है आज हर तरफ ध्यान सिखाया जा रहा है। Apps हैं, courses हैं,…

विज्ञान भैरव तंत्र क्या है?
विज्ञान भैरव तंत्र विश्व का एक महत्त्वपूर्ण आध्यात्मिक ग्रंथ है जो दिव्य की प्राप्ति के लिए १२ सरल विधियाँ प्रदान करता है। तंत्र आपको बिल्कुल वैसे ही स्वीकार करता है जैसे आप हैं। कश्मीरी शैववाद में निहित, यह अद्वैत दर्शन…

‘हा’ ध्वनि ध्यान – २
विज्ञान भैरव तंत्र की इस विधि में, "हा" ध्वनि के माध्यम से मन को शांत किया जाता है। साधना के माध्यम से क्रोध का शमन और अत्यधिक सोच को दूर करने का यह सरल तरीका गहन आंतरिक शांति की ओर…

‘हा’ ध्वनि ध्यान – १
मौन का वास्तविक अर्थ मन को शांत करने में निहित है। इस तकनीक के माध्यम से, हम क्रोध को दमित किए बिना उसे प्रवाह देते हैं, जिससे सच्चा आंतरिक शांति और ध्यान की ओर मार्ग प्रशस्त होता है।

स्पर्श ध्यान
स्पर्श के माध्यम से आनंद की अनुभूति और त्राटक (दृष्टि) ध्यान दोनों ही हमें वर्तमान क्षण में जीने और गहन आंतरिक आनंद का अनुभव करने का मार्ग दिखाते हैं।

निद्रा ध्यान और मनोविज्ञान – ३
चेतना की चार अवस्थाएँ—जागृत, स्वप्न, गहरी नींद, और तुरीय। योगिक नींद के माध्यम से हम इन अवस्थाओं को समझकर गहन आध्यात्मिक जागरण की ओर अग्रसर हो सकते हैं।

निद्रा ध्यान और मनोविज्ञान – २
नींद और विचार पैटर्न हमारे जीवन की कई समस्याओं का कारण हैं। योगिक नींद और आध्यात्मिक साधना के माध्यम से, हम अपने स्वास्थ्य और मानसिकता दोनों को पुनः निर्मित कर सकते हैं।

निद्रा ध्यान और मनोविज्ञान
विज्ञान भैरव तंत्र के सूत्र 75 और 86 के माध्यम से निद्रा के मनोविज्ञान और आध्यात्मिक महत्व को जानें। गुणवत्तापूर्ण निद्रा शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए सर्वाधिक आवश्यक है।

दर्श ध्यान – ३
अंधकार में ध्यान का गहन अभ्यास जो अद्वैत बोध और शून्यता की ओर ले जाता है। दृष्टि को अंदर मोड़ने से जीवन की जटिलताएँ विलीन हो जाती हैं।

दर्श ध्यान – २
प्रकाश और रंगों पर ध्यान के माध्यम से आंतरिक चेतना को जागृत करें। दृष्टि केवल आँखों से नहीं, बल्कि सचेत मन से होती है।
