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  • विज्ञान भैरव तंत्र-चेतना का विज्ञान
    विज्ञान भैरव तंत्र — वह प्राचीन विज्ञान जो आपको स्वयं से मिलाता है | यह कोई धर्म नहीं, कोई कर्मकांड नहीं — यह चेतना का सीधा विज्ञान है आज हर तरफ ध्यान सिखाया जा रहा है। Apps हैं, courses हैं, techniques हैं। लेकिन एक प्रश्न कोई नहीं पूछता — क्या ध्यान सच में एक तकनीक…
  • ध्यान यदि तकनीक नहीं है तो फिर ध्यान क्या है?
    यदि ध्यान कोई तकनीक नहीं है तो फिर ध्यान क्या है? यह प्रशन जहन में उठना स्वाभाविक है | अधिकतर लोग ध्यान को कुछ करने की क्रिया की तरह समझते हैं जैसे किसी वस्तु पर ध्यान लगाना, मन को नियंत्रित करना, मंत्र दोहराना, श्वास को पकड़ना या विचारों को रोकने की कोशिश करना आदि। जबकि…
  • ध्यान कोई तकनीक नहीं है
    आज ध्यान भी धीरे-धीरे एक तकनीक, एक विधि और एक बाज़ारू वस्तु बनता जा रहा है। हर जगह अलग-अलग अभ्यास, निर्देशित प्रक्रियाएँ, श्वास-विधियाँ, शरीर-विधियाँ, कल्पना-आधारित अभ्यास और एकाग्रता के तरीके सिखाए जा रहे हैं। और बहुत लोग इन्हीं को “ध्यान” कहकर आगे बढ़ा रहे हैं। लेकिन यहीं सबसे पहली भूल शुरू होती है। ध्यान स्वयं…
  • प्राण और उपचार
    प्राण न केवल श्वास है, न ऑक्सीजन — यह वह सूक्ष्म शक्ति है जो जीवन को धारण करती है। प्राणिक हीलिंग में जानें कि कैसे प्राणायाम, भ्रामरी और ध्यान के माध्यम से प्राण को जागृत कर स्वयं को और दूसरों को स्वाभाविक रूप से उपचारित किया जा सकता है।
  • प्राण ध्यान
    प्राण वह जीवन-ऊर्जा है जो संपूर्ण ब्रह्माण्ड को व्याप्त करती है। जब ध्यान गहरी एकाग्रता में पहुँचता है, तो प्राणिक संतुलन पर इसका प्रभाव अत्यंत गहरा होता है। प्राण को समझना विश्वास का विषय नहीं, बल्कि आंतरिक प्रक्रियाओं की प्रत्यक्ष प्रतीति है।

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