प्राण ध्यान
प्राण वह जीवन-ऊर्जा है जो संपूर्ण ब्रह्माण्ड को व्याप्त करती है। जब ध्यान गहरी एकाग्रता में पहुँचता है, तो प्राणिक संतुलन पर इसका प्रभाव अत्यंत गहरा होता है। प्राण को समझना विश्वास का विषय नहीं, बल्कि आंतरिक प्रक्रियाओं की प्रत्यक्ष प्रतीति है।



