व्यक्तित्व विकास – २
अत्यधिक आत्मविश्वासी बनने से बचें। हमेशा निर्णयों को विचारशीलता और विनम्रता के साथ लें। याद रखें, कुशल तैराक भी डूब सकते हैं यदि वे लापरवाह हो जाएं।
अत्यधिक आत्मविश्वासी बनने से बचें। हमेशा निर्णयों को विचारशीलता और विनम्रता के साथ लें। याद रखें, कुशल तैराक भी डूब सकते हैं यदि वे लापरवाह हो जाएं।

असफलताएं, असंतोष और आनंद या शांति की कमी प्रायः ऐसी अवस्था का संकेत देती हैं। जब लक्ष्य की बजाय सफलता पर ध्यान केंद्रित होता है, तो इच्छाशक्ति कमजोर पड़ जाती है। परिणामस्वरूप भय, संशय, हीनभावना, क्रोध, निराशा और नकारात्मकता जड़ें जमा लेती हैं।