कुम्भक ध्यान
श्वास की लय और गहराई जीवन की लंबाई निर्धारित करती है। कुम्भक साधना से कुंडलिनी जागरण होता है।

श्वास की लय और गहराई जीवन की लंबाई निर्धारित करती है। कुम्भक साधना से कुंडलिनी जागरण होता है।

श्वास के विराम पर ध्यान केंद्रित करके दैनिक कार्यों में सचेतता और शांति विकसित करो।

सचेत रूप से स्वप्नों पर नियंत्रण प्राप्त करके अवचेतन मन की शक्तियों को जागृत करो।

गहरी श्वास और मानसिक शांति से अवचेतन जगत में प्रवेश करो और स्वप्नों पर सचेत नियंत्रण पाओ।

विज्ञान भैरव तन्त्र सूत्र २६। नाभि-केन्द्र पर श्वास का ध्यान, जीवन का अक्ष, और ध्यान-समाधि की प्राप्ति।

विज्ञान भैरव तन्त्र सूत्र २५। श्वास के परिवर्तन-बिन्दुओं पर ध्यान, रिक्तता का अनुभव, और आत्म-विलयन।