ध्यान कोई तकनीक नहीं है
आज ध्यान भी धीरे-धीरे एक तकनीक, एक विधि और एक बाज़ारू वस्तु बनता जा रहा है। हर जगह अलग-अलग अभ्यास, निर्देशित प्रक्रियाएँ, श्वास-विधियाँ, शरीर-विधियाँ, कल्पना-आधारित अभ्यास और एकाग्रता के तरीके सिखाए जा रहे हैं। और बहुत लोग इन्हीं को “ध्यान” कहकर आगे बढ़ा रहे हैं। लेकिन यहीं सबसे पहली भूल शुरू होती है। ध्यान स्वयं…

